स्‍तनों का आयुर्वेदिक घरेलू उपचार


स्‍तनों का आयुर्वेदिक घरेलू उपचार______

अविकसित स्‍तन, स्‍तनों में सूजन, अतिस्‍थूल स्‍तन, थनैला तथा स्‍तन कैंसर आदि।

सतन कैंसर का घरेलू उपचार

१ * एक ग्‍लास पानी में हर्बल ग्रीन टी को आधा होने तक उबालें और फिर उसे पीएं। यह फाएदेमंद होती है।

२ * रोज अंगूर या अनार का जूस पीने से स्‍तन कैंसर से बचा जा सकता है।

३ * सोंठ, नमक, मूली, सरसों, शमी और सहिजन के बीज को बराबर मात्रा में लेकर खटटे छाछ में पीसकर स्‍तनों पर लेप करें। एक घंटे बाद नमक की पोटली से दस – पन्‍द्रह मिनट तक सिंकाई करें। आराम मिलेगा।

४ * रोज लहसुन का सेवन करने से स्‍तन कैंसर की संभावना को रोका जा सकता है।

५ * पोई के पत्‍तों को पीसकर पिण्‍ड बनाकर लेप करने तथा पत्‍तों द्धारा अच्‍छी तरह ढंककर पटटी बांधने से शुरूआती अवस्‍था का कैंसर ठीक हो जाता है।

स्‍तनों की सूजन

१ * गेंदे की पत्तियों को कपड़े में लपेट कर बांध लें। फिर इसके ऊपर गीली मिटटी का लेप लगा दें। फिर कपड़े की इस पोटली को उस आग की भटटी में रखें जो ठंडी होने वाली हो। फिर जब पोटली के ऊपर की मिटटी लाल हो जाए, तब उसे बाहर निकालें और पत्तियों को अलग कर लें। इसके बाद इन्‍हीं पत्तियों को स्‍तनों पर बांधें।

२ * धतूरे की पत्‍ते और हल्‍दी को पीसकर स्‍तनों पर लेप करने से स्‍तनों की सूजन में आराम मिलता है।

३ * अजवायन का तेल को गुनगुना करके २ – ३ बार स्‍तनों की मालिश करें और फिर अरंड का पत्‍ता बांध दें। सूजन में आराम मिलेगा।

४ * स्‍तनों में यदि सूजन के साथ साथ दर्द भी हो तो इंद्रायण की जड़ को पीसकर लेप बना लें और फिर इसे गर्म करके स्‍तनों पर लेप करने से दर्द कम होता है और सूजन भी कम हो जाती है।

५ * धृतकुमारी यानि ऐलोवेरा के गूदे में हल्‍दी मिलाकर थोड़ा सा गर्म करके लेप करने से सूजन कम हो जाती है।

अविकसित स्‍तन तथा छोटे स्‍तनों को बड़े करने के उपाय

१ * यदि स्‍तन अविकसित तथा छोटे हैं तो बादाम के तेल की नियमित मालिश करने से स्‍तन विकसित व पुष्‍ट हो जाते हैं।

२ * अश्‍वगंधा और शताबरी को बराबर मात्रा में लेकर चूर्णं बनाएं और फिर एक – एक चम्‍मच चूर्णं सुबह शाम दूध के साथ ४५ से ६० दिनों तक खाएं। आपकी चिंता का समाधान होगा।

३ * महानारायण तेल की मसाज से भी अविकसित स्‍तन आकर्षक हो जाते हैं।

४ * पीपरी का चूर्णं २० ग्राम, काली मिर्च का चूर्ण २० ग्राम, अश्‍वगंधा का चूर्णं १५० ग्राम, सोंठ का चूर्णं ७५ ग्राम, लेकर शुद्ध घी में भून लें और फिर आधा किलो पुराने गुड़ की चाशनी बनाकर भूने गए चूर्णं को चाशनी में मिलाकर रख लें। इसे रोज २० – २५ ग्राम मात्रा में रोज गुनगुने दूध के साथ खाने से स्‍तन आकर्षक और पुष्‍ट होते हैं।

५ * खाने में फल, दालें, ताज़ा सब्जियां, काजू, दूध, दही, घी, अंडे, कच्‍चा नारियल व नींबू आदि का सेवन जरूर करें। यह स्‍तनों का अच्‍छी तरह पोषण करते हैं।

अतिस्‍थूल स्‍तन (बड़े तथा लटके हुए स्‍तन)

१ * यदि स्‍तन स्‍थूल हैं तो सबसे पहले आप वसा युक्‍त भोजन खाना बंद कर दें। जैसे कि दूध, घी, मलाई, मक्‍खन तथा मिठाईं आदि। यदि मांसाहारी हैं तो मांस से परहेज करें।

२ * काली गाय के दूध में सफेद मोथा पीसकर लेप करने से स्‍तनों के ढीलेपन में कमी आती है और स्‍तन कठोर होते हैं।

३ * महानारायण तेल स्‍तनों पर लगाकर उंगलियों से दबाकर नीचे से ऊपर की ओर मालिश करें। मालिश के बाद गुनगुने पानी की धार स्‍तनों पर डालें १० मिनट गुनगुने पानी की धार डालने से स्‍तनों की चर्बी घटेगी और सौंदर्य वापस लौट आएगा।

स्‍तनों का थनैला रोग

१ * नींबू के रस में शहद मिलाकर स्‍त्‍नों पर लेप करने से थनैला में बहुत लाभ होता है।

२ * मोगरे के फूलों को पीस कर स्‍तनों पर लेप करके बांध दें। सुबह शाम इस प्रक्रिया को करने से थनैला रोग दो – तीन दिन में ही ठीक हो जाता है।

३ * अरहर की दाल (तुअर दाल) आम की गुठली और जौ को पानी में एक साथ पीसकर दिन में तीन – चार बार लेप करने से बहुत आराम मिलता है।

४ * गेंहू, जौ और मूंग का बराबर मात्रा में लेकर पानी के साथ गर्म करके तकलीफ वाले स्‍थान पर लगाने से आराम मिलता है।

५ * सहिजन की छाल को महीन पीसकर उसका गर्म लेप करने से थनैला बिना पके ही बैठने लगता है।

६ * दस ग्राम काली मिर्च और ५ ग्राम दालचीनी पीसकर इसकी एक खुराक बनाएं। दिन में तीन बार तीन खुराकें २० ग्राम शहद में मिलाकर खाएं। थनैला का उपचार हो गया।

७ * १२५ ग्राम नीम के पत्‍तों को लेकर एक लीटर पानी में उबालें। जब पानी एक चौथाई रह जाए तो उतारकर कपड़े से छानकर थनैला को धोएं। आराम मिलेगा।

८ * हरा धनिए की पत्तियों को पीसकर हल्‍का गर्म करके लेप करें। बहुत आराम मिलेगा।

९ * हल्‍दी और धतूरे के पत्‍ते समान मात्रा में लेकर पीस लें। फिर गर्म करके थनैला पर लेप करें। आराम मिलेगा।

स्तन बढाने के प्राक्रतिक घरेलु उपाय

रोजाना स्तनों की मालिश जैतून के तेल से करने से आपके स्तनों का आकर बढता है. मालिश के द्वारा रक्त परिसंचरण बढ़ जाता है जो की स्तनों के अंदर ऊतकों फैलाने के लिए मदद करता है और उन्हें बड़ा और मजबूत बनाने में मदद करता है.

यह माना जाता है की मैथी के बीज एस्ट्रोजन की मात्रा बढाने में मदद करता है.आप मैथी के बीज का पाउडर बना ले एवं पानी के साथ इसका पेस्ट बना ले अब इस मिश्रण से रोजाना 10 मिनट तक मालिश करे. अच्छे परिणाम के लिए इसे महीने में दो बार अवश्य करे.

सौफ के बीज भी एस्ट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में काफी हद तक कारगर साबित हुआ है. इन बीजो का उपयोग करने के लिए सौफ के बीज को 10 मिनट के लिए तेल डालकर पका ले जब तक की इसका रंग लाल न हो जाये अब इस मिश्रण से रोज़ 10 मिनट तक मालिश करे निश्चित ही आपको अच्छा परिणाम देखेंगे .आप सौफ के बीज की चाय भी पी सकते है.चाय बनाने के लिए 1 कप पानी में सौफ डालकर 10 मिनट तक गर्म करे और रोज़ 1 महीने तक इसका सेवन करे.

स्तनों को बढाने के लिए लाल दाल सस्ती व आसानी से उपलब्ध होने वाला घरेलु उपचार है. लाल दाल को रात भर भिगो दे व इसका पेस्ट बना ले अब इस पेस्ट को अपने स्तनों पर फेलाए व ३० मिनट के लिए सूखने तक छोड़ दे.और फिर ठन्डे पानी धो ले.

प्याज के रस के द्वारा भी स्तनों के आकार में वृधि की जा सकती है , यह एक अच्छा घरेलु उपचार है इसे इस्तेमाल करने के लिए प्याज का रस, हल्दी व शहद का मिश्रण तेयार करे और इसे रात भर के लिए स्तनों पर लगा ले सुबह इसे ठन्डे पानी से धो ले. पानी भी स्तनों को बढाने में कारगर है. पानी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकलवाने में मदद करता है और साथ ही स्तन के ऊतकों को स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है.

केले का सेवन भी आपके स्तनों के आकर को बड़ा करता है व इन्हें खुबसूरत बनाता है. दिन में २ से ३ केले का सेवन करे निश्चित ही आप अच्छा परिणाम पाएंगे.

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परोपकाराय फलन्ति वृक्षा: परोपकाराय वहन्ति नद्यः।

परोपकाराय दुहन्ति गावः परोपकाराय इदं शरीरम्।



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( hari krishnamurthy K. HARIHARAN)"” When people hurt you Over and Over think of them as Sand paper.They Scratch & hurt you, but in the end you are polished and they are finished. ”"Keep away from people who try to belittle your ambitions. Small people always do that, but the really great ones make you feel that you too, can become great."- Mark Twain.

யாம் பெற்ற இன்பம் பெருக வையகம்
பெற்றதாய்தனை மகமறந்தாலும் பிள்ளையைப் பெறுந்தாய் மறந்தாலும்
உற்ற தேகத்தை உயிர்ம றந்தாலும் உயிரை மேவிய உடல் மறந்தாலும்
கற்றநெஞ்சம் கலைமறந்தாலும் கண்கள்நின் றிமைப்பது மறந்தாலும்
நற்றவத்தவர் உள்ளிருந்தோங்கும் நமச்சிவாயத்தை நான்மற வேனே.

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